kaun ho ?

तुम कितनी चोटें खा सकते हो ?
तुम इन्कार में क्यूँ जीते हो ?
तुम्हारे अन्दर जो छुपा बैठा है
तुम्हारे सब अनुभवों का जोड़ है
पर तुम वो नहीं  हो
तुम कौन हो ?
स्वीकारो स्वयं को और जोड़ो
पहचानो उसे, जिसकी संभावनाएं असीम हैं
पूछते हो तुम , कौन हो
तुम्हे जानना होगा की तुम कौन हो.

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