मेरे दोस्त न्यूयार्क की एक मशहूर सड़क पर बैठे हैं
जहाँ की इमारतों में कुछ बाज़ीगर खुदा बनकर बैठते हैं
वाल स्ट्रीट के बाज़ीगर, करोड़ो खवाबों का गला घोंटते हैं
मुहँ से दवा. सर से छत और पावों से ज़मीन खींच लेते हैं
डिग्री के पुलिंदे हैं, मेरे दोस्तों के पास
पर सर घुटनों में दबा कर बैठे थे
अगर आगे देखना जो चाहे तो उन्हें कुछ नहीं दीखता
मुझमे और उनमे साझा है ये दर्द और निराशा
अब हजारों की भीड़ वहां रहती है
हजारों बिखरे तिनके इकठ्ठा जलते हैं
अब बिजली से रौशन नहीं वो सड़क
वहां जमा हुआ असंतोष और विषाद जलता है
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